विस्तार
रामजन्मभूमि पर अब हर दिन उत्सव जैसा माहौल है, जहां पहले पूजा-अर्चना सीमित परिस्थितियों में होती थी। नौ नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रामलला की दुनिया छह साल से कम समय में पूरी तरह बदल गई है।
22 जनवरी 2024 को नवनिर्मित मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा इस बदलाव का सबसे बड़ा पड़ाव बनी। अब रामलला की पूजा-सेवा, मंदिर की भव्यता और उत्सवों के स्वरूप में बड़ा बदलाव आया है। 2019 से पहले रामलला टेंट में विराजमान थे और पर्व मनाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती थी। अब भव्य मंदिर में रामलला की नित्य सेवा व्यवस्थित दिनचर्या के अनुसार होती है।
ये भी पढ़ें – कारोबारी की मौत: अफसर के नाम पर शिवा को धमकाने का श्रद्धा का ऑडियो वायरल, आरोपियों पर 25 हजार का इनाम घोषित
ये भी पढ़ें – छह दिसंबर को मायावती कर सकती हैं देशव्यापी बड़ी रैली, चुनाव के पहले शक्ति प्रदर्शन करने की योजना
उनके वस्त्र, आभूषण, भोग और श्रृंगार में मौसम तथा पर्वों का ध्यान रखा जाता है। विशेष अवसरों पर रामलला का रूप भी बदलता है और आम श्रद्धालु उत्सवों में सहभागिता कर पाते हैं। देश-दुनिया के श्रद्धालु लाइव प्रसारण के जरिये रामलला की नित्य आरती और हर उत्सव के साक्षी बनते हैं। अब मंदिर में रोजाना अनुष्ठान होते हैं।
हर दिन नए वस्त्र, पर्वों पर विशेष अनुष्ठान
राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य अधिकारी राजकुमार दास बताते हैं कि जब रामलला टेंट में थे तो कमिश्नर रिसीवर हुआ करते थे। रामलला को यदि 56 भोग अर्पित करना हो तब रिसीवर से अनुमति लेनी पड़ती थी। यही नहीं साल भर में केवल एक बार रामनवमी पर रामलला के लिए नए कपड़े बनते थे। होली, दीवाली, सावन झूलनोत्सव, जन्माष्टमी जैसे त्योहार परंपरा निवर्हन तक ही सीमित थे। अब मंदिर में न सिर्फ रोजाना अनुष्ठान होते हैं, बल्कि अयोध्या की परंपरा के सभी सालाना उत्सव पूरी भव्यता से मनाया जाता है। रामलला रोजाना नए वस्त्रों व आभूषणों में सजते हैं, रोजाना नए-नए पकवान अर्पित होते हैं।



